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Ranjeeta Dhyani

Abstract

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Ranjeeta Dhyani

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विवाह

विवाह

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जीवन का वह दिन बहुत ही सुहाना था..............,

जिस दिन प्रद्युत घर मेरे आए वह इंसान अनजाना था।

मम्मी - पापा के दिल पर जो अमिट छाप बनाई थी,

उसका गजब परिणाम हुआ कि उन्होंने कुंडली मिलवाई थी।

उसने अपने शांत व्यवहार से हृदय मेरा जीता था,

तुम कितनी स्ट्रिक्ट हो यार कहकर वो मुझे चिढ़ाता था।

पर सगाई का दिन हमारा बहुत ही अलबेला था,

सैकड़ों मेहमानों का लगा जैसे वहां एक मेला था।

मैंने देखा सबके चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ रही थी,

मां भी प्रसन्नता से आगे बढ़ श्रीफल फोड़ रही थी।

रिंग पहनाने का तुम्हारा वह अंदाज़ निराला था,

सस्पेंस बनाकर तुमने सबको घोर चिंता में डाला था।

घुटनों के बल बैठ कर मेरा हाथ जो तुमने थामा था,

ना छोड़ूंगा ये साथ कभी,बहुत खूब वो इकरारनामा था।

खूबसूरत रिश्ते को प्रद्युत तुमने हसीन रंग दिया,

सबका आदर करके तुमने मन खुशियों से भर दिया।

शादी के दिन भी सबने खूब धमाल मचाया था,

लड़का बहुत ग्रेट है यार - सखियों ने मुझे बताया था।

विदाई की भावुक घड़ी में सबने गले लगाया था,

ससुराल पहुंचकर सबने मुझपर खूब प्यार बरसाया था।

मम्मी- पापा ने भी मुझको सीने से लगाया था,

बहू नहीं, तुम बेटी हो हमारी मुझको समझाया था।

वक्त बीतता गया और दस साल हो गए इस पवित्र बन्धन को,

लेकिन अहसास आज भी नया है, पराया कभी लगा नहीं ससुराल मुझको।

प्रद्युत हमारे प्यार की प्रगाढ़ता को यूं ही बरकरार रखना,

पवित्रता की बुनियाद को बेटे अरमान के दिल में भी संजोए रखना।

                    


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