'विकास पथ'
'विकास पथ'
अब तो चहुं दिश हो रहा,
सर्वांगीण विकास।
अपनी-अपनी छत बनी,
बीता अब वनवास।
अश्व प्रगति का चल रहा,
अहर्निश-दिन और रात।
शीत पड़े या ग्रीष्म ऋतु,
अथवा हो बरसात।
कोरोना की जंग में,
हम हो जायेंगे पास।
अब तो टीका लग गये,
एक अरब के पास।
मोदी जी जन से करे,
अपने मन की बात।
आओ हम मिलकर चलें,
डाल हाथों में हाथ।
