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ritesh deo

Inspirational

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ritesh deo

Inspirational

वहमी

वहमी

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कहते हैंं,

औरतें होती हैंं वहमी ।

हां बिल्कुल, औरतें होती हैंं वहमी ।

पर,

अपने लिए नहीं ,अपनों के लिए …

खुद की बीमारी को हरदम पीछे डालती हैं ,

डॉक्टर तो वहम में डाल देगा ,

कहकर खुद के इलाज को टालती हैं ॥


पर जब बच्चा हो बुखार में ,

बेशक करती हैं मालिश , मरहम और दवाई ।

और साथ में करती हैं - नून राई।

कभी नजर की बाती ,

कभी नजर का टीका ।

कभी मन्नत का धागा ।

मां हैं ना ,

कहीं कोई कमी तो रह जाए ना ।

जिस भगवान के सामने हाथ जोड़ती हैं ,

और पल में रो रो कर दे देती हैं उलाहना ॥


नहीं देख सकती वो बच्चे को भूखा ,

एक वक्त ना खाएं खाना तो ,

10 बार माथा छूकर देखती हैं ,

हर 1 मिनट बाद टोकती हैं ।

खाने में 50 ऑप्शन बताती हैं ,

मां हैं ना ,

बच्चों को उनसे खुद से बेहतर जानती हैं ।

और हर आखिरी जतन कर डालती हैं ।

मां हैं ना ,

और मां कहां हार मानती हैं ?

पर बच्चों को कहां समझ आता हैं,

उन्हें समझ आता हैं कि ..

औरतें होती हैं वहमी ।



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