Dheerja Sharma
Abstract
वह नहीं समझ पायेगा कि
काम से लौट कर काम पे लगना
कैसा होता है।
वह यह भी नहीं समझ पायेगा
कि पुरुष का संडे
बच्चों का फन डे
उसका रन डे क्यों होता है !
वह स्त्री नहीं है...
नहीं समझ पायेगा !
वह नहीं समझेग...
ऐ अच्छी औरत
दर्जी हूँ
पत्नी और चाय
शुक्रिया सैनि...
भू स्खलन
झूठ बोलता है
अलविदा
मेरा घर
युद्ध या बुद्...
राजमुकुट की वापसी की खातिर चिंता में रहने लगी राजमुकुट की वापसी की खातिर चिंता में रहने लगी
हर दिल में गर्व सम्मान का चमत्कार है हमारी लक्ष्मी का बेटा जिले सुबेदार है हर दिल में गर्व सम्मान का चमत्कार है हमारी लक्ष्मी का बेटा जिले सुबेदार है
अपने से दूर रखने का इंतजाम करते जा रहे हैं। अपने से दूर रखने का इंतजाम करते जा रहे हैं।
जीवन में जब से हुआ,में समझदार तब से अपनों से मिलने लगा,दुत्कार। जीवन में जब से हुआ,में समझदार तब से अपनों से मिलने लगा,दुत्कार।
बाईस नवंबर दो हजार चौबीस का दिन और आसीन हो जायेंगे अयोध्या के राजा राम। बाईस नवंबर दो हजार चौबीस का दिन और आसीन हो जायेंगे अयोध्या के राजा राम।
हौसलों की उड़ान में,इरादों को मकसद बनाकर तो देखो। प्रगति पथ पर तुम, हिम्मत से कदम उठाकर तो देखो। ... हौसलों की उड़ान में,इरादों को मकसद बनाकर तो देखो। प्रगति पथ पर तुम, हिम्मत से ...
मुझे हराने के लिए तुमने, मुझे बहुत दुश्वारियां दी, अब क्या सोचा है, जीतने से कैसे रोको मुझे हराने के लिए तुमने, मुझे बहुत दुश्वारियां दी, अब क्या सोचा है, जीतने से ...
अगली पीढ़ी के लिए मौत का उपहार अपने ही हाथों से तैयार कर रहे हैं। अगली पीढ़ी के लिए मौत का उपहार अपने ही हाथों से तैयार कर रहे हैं।
क्यों की न हम कभी सृष्टि को कुछ दे पाये हैं, और न कभी कुछ दे पायेंगे और न कभी कुछ दे पायेंगे ! क्यों की न हम कभी सृष्टि को कुछ दे पाये हैं, और न कभी कुछ दे पायेंगे और न कभी...
रामराज्य का हमें भी तो कम से कम एक बार दर्शन कराओ। रामराज्य का हमें भी तो कम से कम एक बार दर्शन कराओ।
बस खाना - डरना और जनना, इतने में ही, इंसान क्यों पड़ा है? बस खाना - डरना और जनना, इतने में ही, इंसान क्यों पड़ा है?
गुलामी की बेड़ियों को हमने कई वर्षों तक सहा है, क्या होती गुलामी लंबे समय तक महसूस किय गुलामी की बेड़ियों को हमने कई वर्षों तक सहा है, क्या होती गुलामी लंबे समय तक ...
सूरज की किरणों से आज, स्वयं नग्न जल जाऊं मैं सूरज की किरणों से आज, स्वयं नग्न जल जाऊं मैं
अब तक अपने मन के भाव तुमने व्यक्त किए, अब मेरे भावों को समझना तुम अब तक अपने मन के भाव तुमने व्यक्त किए, अब मेरे भावों को समझना तुम
राम वनवास की यही कहानी थी जिसे किसी ने भी न जानी थी । राम वनवास की यही कहानी थी जिसे किसी ने भी न जानी थी ।
ए `प्राण` बुढापे का निरादर नहीं करना इक रोज़ हरिक शख्स को आता है बुढ़ापा। ए `प्राण` बुढापे का निरादर नहीं करना इक रोज़ हरिक शख्स को आता है बुढ़ापा।
अप्राकृतिक खाद्य पदार्थों का लुप्त होते जाना स्वास्थ्य पर बीमारियों का पहरा अप्राकृतिक खाद्य पदार्थों का लुप्त होते जाना स्वास्थ्य पर बीमारियों का पहरा
प्रभु मूरत देख कर देवता अयोध्या में रहे, ये करें विचार। प्रभु मूरत देख कर देवता अयोध्या में रहे, ये करें विचार।
मुझे माफ कर देना मां, मैं चाहकर भी तुमसे मिलने ना पाया। मुझे माफ कर देना मां, मैं चाहकर भी तुमसे मिलने ना पाया।
आज भी वे कविताएं अपनी गूँज लिए रसोई में रहती हैं जहाँ माँ कविता बनाया करती थी। आज भी वे कविताएं अपनी गूँज लिए रसोई में रहती हैं जहाँ माँ कविता ...