STORYMIRROR

Jyoti Sharma

Abstract

3  

Jyoti Sharma

Abstract

वास्तविकता

वास्तविकता

1 min
198

यह सब जो आसमां से आए हैं

कुछ नहीं बस वक्त ही के साए हैं

तू क्या होगा मेरा मैं क्या हूंगी तेरी

सबका बस वही है ये रिश्ते जिसने बनाए हैं

कौन दुख दे सकता है तुझे मुझे या उसे

किसी और ने नहीं ये दुख खुद ही के कमाएं हैं

पछताना होगा जान लो जो चले गए उन पर

समेट लो वो पल जो बेकार ही में गवांए हैं

जीवन नहीं है सब रेत के घरौंदे हैं

कुछ तूने बनाए हैं कुछ मैंने बनाए हैं


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract