Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

yogita singh

Abstract

2  

yogita singh

Abstract

वाह री दुनिया

वाह री दुनिया

1 min
185


वो गए थे बड़ी शान से इस गांव से उस शहर की ओर , 

जब खाई ठोकरें तो चल पड़े गांव की ओर ,    

  

दिल निकाल के दे दिया गांव की उस गोरी ने 

वो बेच आए इमान अपना चंद पैसे का मोह


कितना खुदगर्ज कमजर्फ हो गया है इंसान 

वाह री दुनिया वाह री लोग।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract