ऊपर वाले की आवाज़
ऊपर वाले की आवाज़
अहंकारी चोला पहना तुमने
माया को श्रेष्ठ बताया तुमने
छल - कपट की माला जपकर
पाप - कर्म कमाया तुमने।।
अपनी काली करतूतों पर
खूब धमाल मचाया तुमने
कोमल कलियों के दामन पर
अमिट दाग लगाया तुमने।।
ईश्वर की निन्दा की तुमने
भ्रमित ज्ञान फैलाया तुमने
सज्जनों का निरादर कर
हया को दूषित किया है तुमने।।
रिश्तों में समर मचाया तुमने
रक्तपात बहाया तुमने
मानवता को कलंकित कर
दानवता को अपनाया तुमने।।
हे! अभिमानी, अज्ञानी मानव
अपना अस्तित्व बचाने हेतु, तुमको
सुधरना होगा, बदलना होगा,
त्यागकर फरेबी कामकाज
अंततः अनायास ही पतन की
कोख में समा जाओगे........
जब आएगी ऊपर वाले की आवाज़।।
