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Sumit. Malhotra

Abstract Action Classics

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Sumit. Malhotra

Abstract Action Classics

उसकी महक से

उसकी महक से

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उसकी महक से ही महक रही हमारी ज़िंदगी, 

उसकी ख़ुशबू से महक रही है हमारी ज़िंदगी। 


सुबह उठकर ही अदरक वाली चाय की महक, 

लग जाती है तलब चाय के दीवानों को सहज।

 

साथ-साथ आते और जाते कॉलेज हम दोनों, 

चाय के दीवाने पीकर चाय कैंटीन पर दोनों। 


दोस्ती की महक प्यार में ही बदल गई यारों, 

वो हमारी और हम उनके दीवाने हुए यारों। 


उनकी क़ातिल सी अदाओं ने दीवाना बनाया, 

रेशमी बालों की महक ने मस्ताना था बनाया। 


तेरी ख़ुशबू सी महक मेरी आत्मा में बस गई, 

तेरी सुंदर आँखें और सादगी दिल में समा गई। 


उन्होंने पूछा हमसे तन-मन में तुम्हारे क्या बता, 

महक तुम्हारे इश्क़ की हमने भी इतना ही कहा।


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