STORYMIRROR

Jyoti Dhankhar

Abstract

3  

Jyoti Dhankhar

Abstract

उसका प्यार

उसका प्यार

1 min
239

चूम मेरे माथे को वो उन सिलवटों को मिटा देता है

जो वक़्त बड़े करीने से मेरी पेशानी पे सज़ा जाता है 


रूबरू हो कर अपने महबूब के इतरा सी जाती हूं मैं

बस वक़्त को वहीं ठहरा लेने को मचल जाती हूं मैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract