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Jyoti Dhankhar

Abstract

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Jyoti Dhankhar

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उसका प्यार

उसका प्यार

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चूम मेरे माथे को वो उन सिलवटों को मिटा देता है

जो वक़्त बड़े करीने से मेरी पेशानी पे सज़ा जाता है 


रूबरू हो कर अपने महबूब के इतरा सी जाती हूं मैं

बस वक़्त को वहीं ठहरा लेने को मचल जाती हूं मैं।


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