STORYMIRROR

Jyoti Dhankhar

Abstract

3  

Jyoti Dhankhar

Abstract

ज़िंदगी की गलती

ज़िंदगी की गलती

1 min
127

जिंदगी की एक ही गलती बहुत भारी रहा 

खुद से मोहब्बत ना निभाना कष्टदायी रहा 

औरों से प्यार निभाते खुद को मैं भूले रहा 

अब होश आया है जब वो साथ निभा रहा

मन का अब सब मैं बाहर निकाल रहा 

खैर अब खुद से भी मोहब्बत मैं निभा रहा

खैर अब खुद से भी मोहब्बत मैं निभा रहा


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract