STORYMIRROR

Jyoti Dhankhar

Abstract

4  

Jyoti Dhankhar

Abstract

तुम बिन

तुम बिन

1 min
262

मैं तुझ में कहीं ठहर गया हूं 

ये चाय का मिट्टी का कप 

ये जलता हुआ अलाव

और पीछे कानों में गूंजते

कुछ किशोर रफी के गाने

बहुत कुछ याद आता है 

तेरा मेरे शाने पे सर रखना

वो तेरा चपर चपर बोलना

जाने कहां कहां के किस्से सुना ना

एक ही शॉल को लपेट कर बैठना 

ये पीछे का आंगन और तेरे ये पौधे

सब कुछ तुझे बुलाता है मेरे मीत

यादें कसक जगाती हैं गाती हैं तेरे ही गीत

सात समंदर पार जो तू जा बैठी है

लौट आ ये मेरा मन सब तुझ बिन खाली है 

वतन में भी रोटी है मोहब्बत है 

चली आ मेरी जान मुझ में रवानी ले आ

देख कैसे अधूरा हूं तुझ बिन 

सब कुछ निपट सुन्न है तेरे बिन 

लौट आ मेरे ठहरे हुए जीवन में 

जीवन तरंगिणी बन , गंगा की लहरों सी

आ तू मुझ सागर में समा 

खुद पूर्ण हो मुझे पूरा कर जा।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract