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Awadhesh Uttrakhandi

Romance

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Awadhesh Uttrakhandi

Romance

उसका अहसास और यात्रा

उसका अहसास और यात्रा

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तेरा अहसास हर रोज नया अहसास

जैसे हर दिन नया हर रात नई।

हर सुबह नई हर शाम नई,

तेरा अहसाह हर रोज नया अहसास।


सर्द रातो का अहसास, गर्म सा

और गर्म आहो में नमी सा

जब दूर होती तो लगता है तुम हो

जब पास होती तो कुछ खोया सा

तेरा अहसास हर रोज हर नया अहसास।


जैसे हर दिन नया हर रात नई

हर सुबह नई हर शाम नई

तेरा अहसास कुछ नया,

हर रोज कुछ देता हैं

प्रेम की हलकी कशिश और आंखों में चुभन

दे जाती है।


तेरा अहसास हर रोज एक नया अहसास

दे जाती हैं

कितने दिन और युही अहसाह में कटेंगे

कब तक ये दिन ये रात यूँ ही आने जज्बात के

आँसू में बहँगे।


तेरा अहसास हर रोज नया अहसास

जैसे समुन्द्र मैं नदी का मिलना और न बुझती प्यास

जैसे जीने की चाह पर जीवन का अंत

तेरा अहसाह हर रोज एक नया अहसास

जैसे नसों में दौड़ता खून का गर्म प्रवाह।


तेरा अहसाह जैसे चांदनी रात में

चन्द्रमा का प्रकाश

तेरा अहसाह हर रोज नया अहसास

जैसे बसंत में फूलों का खिलना

जैसे मोर का नृत्य


और हल्की हल्की बारिश में होठों का मिलना

तेरा अहसास हर रोज नया अहसास।


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