STORYMIRROR

Manoj Kumar

Action Thriller

4  

Manoj Kumar

Action Thriller

उनकी  न  आने की  ख़बर.., न  जा

उनकी  न  आने की  ख़बर.., न  जा

1 min
283

उनकी न आने की ख़बर न जानें की

है तो बस सताने की

क्या माँगता उसे मैं...

माँगता तो सिर्फ़ आने की


मुझमें अब सबकुछ है

वो नहीं तो लगता अधूरा- अधूरा

ओर जब आ जाते हैं..

तब लगता है पूरा- पूरा 


उनकी बातें अब तो चोट  सी

अब तपता दिल जैसे ईट सी

काबू में नहीं अब नसें..

बनी रहती हैं आहट सी


भीख - सी बन जाती  कुछ पल

उनकी आने की ख़बर दो पल

मैं खटखटाता हूँ  दरवाज़े..

बस ख़ुशी - ख़ुशी हरपल


होते हुए गुजरता है

नक्शे देखते हैं चौखट से

नहीं दिखता है कुछ भी..

बस सबेरा होती है करवट से


धूमिल- धूमिल सा चेहरा

मुँह धोकर उठता हूँ

देती है उनकी साया धोखा..

मैं सहता हूँ सहता हूँ!!


झलक भी न दिखती हैं

राहें सूनी - सी लगती हैं

यादें आवारा है मेरी..

बस उनको ही ढूँढती है


घिसती - पिटती हैं साँसें

कुछ नगमें बिखरती है

कम पड़ते है स्वर

जब आँखें उन्हें बुलाती हैं !


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Action