उनकी न आने की ख़बर.., न जा
उनकी न आने की ख़बर.., न जा
उनकी न आने की ख़बर न जानें की
है तो बस सताने की
क्या माँगता उसे मैं...
माँगता तो सिर्फ़ आने की
मुझमें अब सबकुछ है
वो नहीं तो लगता अधूरा- अधूरा
ओर जब आ जाते हैं..
तब लगता है पूरा- पूरा
उनकी बातें अब तो चोट सी
अब तपता दिल जैसे ईट सी
काबू में नहीं अब नसें..
बनी रहती हैं आहट सी
भीख - सी बन जाती कुछ पल
उनकी आने की ख़बर दो पल
मैं खटखटाता हूँ दरवाज़े..
बस ख़ुशी - ख़ुशी हरपल
होते हुए गुजरता है
नक्शे देखते हैं चौखट से
नहीं दिखता है कुछ भी..
बस सबेरा होती है करवट से
धूमिल- धूमिल सा चेहरा
मुँह धोकर उठता हूँ
देती है उनकी साया धोखा..
मैं सहता हूँ सहता हूँ!!
झलक भी न दिखती हैं
राहें सूनी - सी लगती हैं
यादें आवारा है मेरी..
बस उनको ही ढूँढती है
घिसती - पिटती हैं साँसें
कुछ नगमें बिखरती है
कम पड़ते है स्वर
जब आँखें उन्हें बुलाती हैं !
