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Laxmi Dixit

Abstract Inspirational

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Laxmi Dixit

Abstract Inspirational

उमापति

उमापति

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उमा पति ध्यान मगन थे, 

उमा रहीं थी ऊब।

बंद नयन कर हाथ से, 

कौतुक करतीं खूब।। 

हिल मिल कर रहते सभी, 

पशु संग भूत-प्रेत।

शिव गढ़ सब कहलाये ये,

पुजें पशुपति समेत।।



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