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Surendra kumar singh

Abstract

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Surendra kumar singh

Abstract

उड़ान

उड़ान

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मन उड़ान पर है

और शरीर ध्यान सा स्थिर है

दृष्टि है मन की उड़ान पर।


दिलचस्प सफर है

देश बोल रहे हैं

देशों की राजधानियां चीख रही हैं

और मनुष्य ध्यान में है


महसूस कर रहा है

खामोशी की चैतन्यता

अनुभव का शब्दों के लिये मचलना

सुन रहा है


आस्था का भौंकना

देख रहा है नदी का रास्ता बन जाना

और ऐसे ही परिवेश में

एक काया का

शरीर में घुलना

और मन्जिल का पास आ जाना।


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