STORYMIRROR

Nitu Arora

Abstract

3  

Nitu Arora

Abstract

उदास मन प्रभु रहम कर

उदास मन प्रभु रहम कर

1 min
444

प्रिय डायरी

आज मन हैं बहुत उदास

नहीं सुधर रहे हैं हालात

 सरकार व पुलिस कोशिश कर रही हैं 

पर जनता नही सुधर रही हैं


रह रही हैं बाहर घर से 

जाने क्या नशा चढा हैं सर पे

समझा रही हैं मीडिया इनको

घर से बाहर दावत हैं कोरोना को


हे प्रभु कर दे मेहर

मिटा दे ये कहर 

तू ही कर सकता हैं

आदमी तेरे हाथ का पुतला हैं

भूल चुक माफ कर

हे प्रभु रहमत कर रहमत कर !


రచనకు రేటింగ్ ఇవ్వండి
లాగిన్

Similar hindi poem from Abstract