Republic Day Sale: Grab up to 40% discount on all our books, use the code “REPUBLIC40” to avail of this limited-time offer!!
Republic Day Sale: Grab up to 40% discount on all our books, use the code “REPUBLIC40” to avail of this limited-time offer!!

Manoj Murmu

Tragedy

4.4  

Manoj Murmu

Tragedy

तुम्हें क्या मिलता है?

तुम्हें क्या मिलता है?

1 min
217



अदिवासी भी कोई हिन्दू 

कोई सनातन कोई ईसाई है;

ए दोस्त,!जात-पात की

बातें बोलकर क्या मिलता है?

कब तक लड़ते रहेंगे इस तरह

हम आपस मे ही रोज रोज;

धर्म के नाम पर भेदभाव

करने से तुम्हें क्या मिलता है?


देखो जरा हम आदिवासियों की

दशा एक दफा गौर से;

हमारी जमीनें लुट रही है

पलक झपकते झपकते।

हमारी संस्कृति भी तो

लुप्त होती जाती है धीरे-धीरे;

अब बोलो आपस में ही

लड़ने से तुम्हें क्या मिलता है?


रोड किनारे हटिया में 

हाड़ियाँ दारू बेचते नजर आते है;

पूर्वज तो इसका उपयोग केवल 

धार्मिक कामों में ही किया है।

दारू बेचते महिलाओं को देख

लगता क्या ये हमारी संस्कृति है?

इनपर गौर करो इधर-उधर की

बाठें करने से तुम्हें क्या मिलता है?


आदिवासी एक आदिवासी थे

और अब भी आदिवासी ही है;

न तो वो हिन्दू है और नही

ईसाई है ना ही कोई और हैं ।

वो तो सच्चे और अच्छे इंसान हैं

वो प्रकृति प्रेमी है उनका दिल तो निर्मल है;

इनको धर्म के नाम से लड़ाने से

तुम्हें क्या मिलता है??


कोई तो डर से कई तो लाचार

और कमजोर हुए चले है;

आपस मे एकता और एकजुट

होने की जरूरत है सबको।

इस घड़ी में तुम जाति-धर्म

और भेदभाव के पाठ पढ़ा रहे हो,

लोगों के एकता में फूट डालने से

तुम्हें क्या मिलता है???



Rate this content
Log in

More hindi poem from Manoj Murmu

Similar hindi poem from Tragedy