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Manoj Murmu

Abstract

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Manoj Murmu

Abstract

किसे पता है

किसे पता है

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किसे पता है कल क्या होगा...

आज दिल मे भरा प्रेम की फुहार है तो..

कल नफरत का धार होगा..


किसे पता है कल क्या होगा...

आज जिसके लिए घण्टों इंतजार करते हो..

कल उसे तेरा कद्र न होगा..


किसे पता है कल क्या होगा..

आज तक हंसते मुस्कुराते हो खिलखिला के..

कल आंसुओं का धार होगा...


किसे पता है कल क्या होगा...

आज तुम स्वस्थ हो सांसे चल रही है..

कल अचानक बन्द होगा।


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