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Shalinee Pankaj

Romance

3  

Shalinee Pankaj

Romance

तुम्हारे लिए

तुम्हारे लिए

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246

मेरी ज़िन्दगी है तू मेरी बन्दगी भी है तू

तुझसे अलग तो मैं हूँ ही नहीं 

मेरे महबूब सात जन्मो का नहीं 

हर जन्म में तेरा साथ चाहूँ 

आज चाँद से दुआओं में यही मैं मांगु

तेरे हर पल में अधिकार रहे 

तेरी हर बात को मैं स्वीकार करूँ 

पर परिपक्वता नहीं चाहिए प्रेम में 

चाहूँ करनी नादानियां 

और भूल जाओ तुम अपनी सब परेशानियां 

जैसे तुम्हें देख मैं खुद को ही भूल गई 

भूल गई संसार 

याद रहा एक तार 

जो तेरे दिल को मेरे दिल से है जोड़ता 

आज भी हम वैसे ही 

जैसे कल ही तो मिले थे 

और पहली मुलाकात 

आज भी है वो एहसास 

हाँ तुम सिर्फ मेरे लिए बने हो 

रहोगे दिल में खास

हरदम हमेशा 

और लूँ जब अंतिम सांस

मेरे हर कण में

सिर्फ तुझे पाने की रहे प्यास 

नहीं चाहूँ परमात्मा तुझसे मिलना

मेरी रूह जो तेरी रूह से मिल गई 

पिया तुझमे ही मैने ईश्वर को पा लिया 

ना जाना चाहूँ कोई तीर्थ 

तेरे चरणो मे जो मैने चारो धाम पा लिया

बस हर पल की यही दुआ 

मैं प्रेम मे हूँ तेरे 

प्रेमिका हूँ मैं तेरी

तू मुझको जी ले तो ज़रा 

कुछ पल की भी नाराजगी तेरी 

उमर मेरी कमी कर देती है 

और हँसी लबो की तेरी 

अमरत्व मुझे दे देती है 

लिखती हूँ कवितायें तुमपर 

हाँ सिर्फ तुमपर 

लिखती रहूँगी सिर्फ तुम्हारे लिए 

इस इंतजार मे .......

की तेरे ज़ज़्बातों में

मैं भी इक दिन ढल जाऊँगी 

तेरे रूह से 

तेरे दिल की कलम तक बह जाऊँगी 

तु पढ़े या ना पढ़े मुझे

मैं तुझको पढ़ना चाहूँगी 

तेरे दिल के हर ज़ज़्बातों में

मैं खुद को पाना चाहूँगी 



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