STORYMIRROR

क़लम-ए-अम्वाज kunu

Drama Romance Fantasy

4  

क़लम-ए-अम्वाज kunu

Drama Romance Fantasy

तुम्हारा प्रेम हूँ मैं

तुम्हारा प्रेम हूँ मैं

1 min
215

 चलु कदम में रुक तुम्हारे 

बहक जाउँ अटकलियों अदाओं में तुम्हारे 

एक ही टहनी पे लटका आम हूँ मैं 


कब तलक दूर रहूँ चाहत के अद्वितीय भूख से तुम्हारे

हँस लूँ पनाह में तुम्हारे 

ज़रा सौ लूँ कोपल बांहों में तुम्हारे 

तुमसे सृजित तुम्हारा ही तो अंस हूँ


कब तक फासलों में लिपटा विमुक्त रहु आवरण से तुम्हारे

दृस्टि सा नैनो में तुम्हारे 

सुकूँ प्राप्त करूँ तिलिस्मी सा गोद में तुम्हारे

तुम्हारा ही तो बीज रोपित वो आंशिक प्रेम हूँ 

तुम्हारे सजल ओठ और अनुरागी ह्र्दय से


अछुता कब तलक रह इस वसुंधरा पे सार्थक कहलाऊंगा 

ये स्याही ये जीवित कविता कहती यथार्थ सारी

हमदोनों है पूर्ण एकदूसरे के साथ ये आकाश ये कायनात

साक्ष्य में रचते इतिहास की गाथा हमारी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama