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AVINASH KUMAR

Romance

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AVINASH KUMAR

Romance

तुम प्रेम करना जानती हो क्या?

तुम प्रेम करना जानती हो क्या?

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तुम प्रेम करना जानती हो क्या?


एक ही टीस को जीवन भर सीने में रखना आता है?

छुपकर चुपके चुपके तुम्हें सिसकना आता है?

किसी की याद में आँखें भरना जानती हो क्या?


तुम प्रेम करना जानती हो क्या?


कभी बँधे बँधाये रिश्तों से परे सोचा है तुमने?

कभी यूँ ही खुली आँखों से ख़्वाब देखा है तुमने?

अपनी हक़ीक़त से ख्यालों में उतरना जानती हो क्या?


तुम प्रेम करना जानती हो क्या?


तुमने कभी ख़ुद में किसी और को महसूस किया है?

अपना दिल किसी और के सीने में महफूज़ किया है?

किसी के सीने में दिल बनके धड़कना जानती हो क्या?


तुम प्रेम करना जानती हो क्या?


तुम रहती होगी न ख़ुद को समेटकर दुनिया के आगे

सलीके से बाँधे होंगे तुमने अपनी शख्सियत के धागे

किसी के आगे डोर खींच के बिखरना जानती हो क्या?


तुम प्रेम करना जानती हो क्या?


कभी किसी को ढूँढते हुए भटकना आया है तुम्हें?

आगे चलते चलते कभी पीछे पलटना आया है तुम्हें ?

कभी किसी के लिए बेवजह ठहरना जानती हो क्या?


तुम प्रेम करना जानती हो क्या?


चलो हटाओ सब बात क्या दूर रहना पता है तुमको?

क्या हमेशा मौन रखकर हर दर्द सहना पता है तुमको? 

किसी को मिल गयी हो पर बिछड़ना जानती हो क्या ?


तुम प्रेम करना जानती हो क्या?



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