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Neha sharma

Inspirational

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Neha sharma

Inspirational

टिमटिमाते तारे

टिमटिमाते तारे

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टिमटिमाते तारों के सम

सपने भी टिमटिमाते हैं

पूरे कहाँ हो पाते हैं मनचाहे

बहुत से अधूरे रह जाते हैं

मुकम्मल कहाँ होता हर ख्वाब

उलझने पली हुई बेहिसाब

कुछ सवाल यूँ खलते हैं

मिलता नहीं जिसका कोई जवाब

कुछ सुकून पलों की चाह में

उम्र अब ढलान पर आ गई

मयस्सर होता नहीं हर किसी को सुकून

धीरे से कानों में कहकर समझा गई

पर हम भी कहाँ मानने वाले

सुकून की उम्मीद कभी न छोड़ेंगे

आखिर हार मानना ही पड़ेगा

इतना उसे मजबूर कर देंगे

मन में भर पूर्ण विश्वास

एक और प्रयास की लिए आस

अपने आज को जिंदादिली से जियेंगे

कल की खातिर अपने आज को जाया न करेंगे।

                       



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