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Sangeeta Ashok Kothari

Inspirational

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Sangeeta Ashok Kothari

Inspirational

तपती गर्मी

तपती गर्मी

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पतिदेव और दोनों बच्चे आज कुछ जल्दी ही घर आ गये,

घर जैसा सुख कहाँ! सब लम्बी साँसे लेते हुए बोले,

तुम बाहर जाकर देखो तो सही मानो अँगारे बरस रहे,

हाँ माँ, मेरे ऑफिस में भी यही हाल था, पापा सही कह रहे,

मम्मी शिकँजी, रस या आम शेक बना दो जरा जल्दी से,

हम तीनों रस पीकर आराम करेंगे वातानुकूल कक्ष में,

मैं चुपचाप रसोई की तरफ़ बढ़ गयी कुछ सोचते हुए,

निम्बू निचोड़, बर्फ़, शक़्कर, पुदीना डाल मथनी घुमाई मैंने,

शिकंजी गिलासों में भर के कक्ष की ओर चल दी मैं,

फिर ख़ुद पर नियंत्रण रख शांत तरीके से मैं बोली उनसे,

ऐसा है कि गर्मी तो छू कर भी नहीं निकलती इस घर में,

रसोई में तो हर प्रहर बहते रहते ठंडी-ठंडी हवा के झोंके,

तुम्हारी फरमाइशों के मुताबिक अलग-अलग भोजन बनते,

चाय से शुरू, फिर नाश्ते, टिफ़िन दो समय के व्यंजन बनते,

एक बार गैस के पास खड़े होकर तो देखो तपती गर्मी में,

ऐसी भीषण गर्मी में रसोई में नहा लेते स्वयं के पसीने से,

गर्मी में साँसे हलक में अटकती फल, सब्ज़ी एवं सामान खरीदते,

कोई भी काम सहज में नहीं होता तुम क्यूँ नहीं समझते!

भाग्यशाली हैं कि पंखा, एसी, कूलर सब नसीब हैं हमें,

जीव, जंतुओं, पक्षियों की हालत कैसी होगी सोचा तुमने! 

कभी मजदूरों, कारीगरों, दिहाड़ियों को देखो तपती गर्मी में,

दशा महसूस कर सको हो तो बाँटो रस या पानी की बोतलें,

किया धरा सब हम मानवों का ही, प्रकृति से ही खेल रहे,

जरूरतमंदो की मदद करें आज से ये अच्छी पहल शुरू करें,

माँ हमें माफ़ कर दो, इतनी गहराई से कभी नहीं सोचा हमने,

हमारी वजह से तपती गर्मी में किसी को राहत मिलें प्रयास करेंगे।



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