STORYMIRROR

Yogesh kumar Dhruw

Abstract

4  

Yogesh kumar Dhruw

Abstract

तोत्ते चान

तोत्ते चान

1 min
473

एक लड़की 

निश्च्छल मन

चंचल मन 

खेलना


फुदकना चाहती

आशाएं लिये

भावनाए सँजोए 

मन में

आसमान सी  

पर्वत सी


नदियों की धार सी

बगियों की फूल सी

हा मैं एक लड़की

पकड़ी माँ की उंगली 

खुशी से आनंदित 


उठी झूम

जाना था स्कूल

कल्पना की क्यारियां

डेस्क की आवजे

धम-धम

बंधा सा

ठगा सा


झरोखे पर खड़ी

हा एक लड़की

करती प्रश्न

अबाबील से

क्या करोगे बाते मुझ से


हाँ करोगे बाते

हाँ एक लड़की

तोत्ते चान हूँ

बार-बार टीचर की

डांट फटकार

न करो खीझता


मन में अकुलाहट

प्रकृति सा चंचल

उमंगतास्वतंत्रता

बचपन मन को

न करो दूर

अपनत्व की भाव चाहिए


ऐसी कल्पना लिये

हाँ मिल गया 

मिल गया

इक छोटी सी आशा

खोजता मन मेरा

अपनत्व निजता की भाव

छोटी सी आशाएं


मन की उमंगता

इठलातीबलखाती

चंचलता की राह बनाती

जो समझे भाव

बरबस मेरी मन की भावना

एक ऐसा इंसान


प्रकृति की रम्यता

हर भावों को जोड़ना

बनता मदारी

करता करतब

हाँ चाहती हूँ।


ऐसी भाव

हाँ तोत्ते चान हूँ

मुझे जाना है स्कूल

जाना है

जाना है

स्कूल

हाँ मैं तोत्ते चान हूँ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract