❤️तलाश-ए-शोभना
❤️तलाश-ए-शोभना
एक अनजानी मंज़िल के लिए निकला हूँ,
घूमते-फिरते अनजाने राहों पर निकला हूँ!
तुमको क्या बताऊँ, संगदिल हसींना,
तुम्हारी मोहब्बत के लिए निकला हूँ।
हर मोड़ पर बस तेरी ही तलाश है,
दिल में जलती एक मीठी सी प्यास है।
तू मिल जाए मुझे, "शोभना"
मेरी ज़िंदगी की यही आस है।
मौत आने से पहले तुझे गले लगा लूँ,
तेरी मोहब्बत के कुछ दिए जला लूँ!
अब चाहे जो भी हो अंजाम-ए-सफ़र,
बस तेरे संग ज़िंदगी गुज़ारने की आस है।
...........Adi🖋

