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Aditya Singh

Classics

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Aditya Singh

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मैं तो दिया हूं

मैं तो दिया हूं

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​चलता रहा हूँ मैं, जलता रहा हूँ मैं,

रोशन कर दुनिया को, अंधेरे में रहा हूँ मैं।

आज तुम मुझे पहचानते नहीं हो,

अपने ही अतीत को मानते नहीं हो।

​खुद को मिटा कर, बनाया है तुमको,

सारे जहाँ की धूप से, बचाया है तुमको।

छोड़ गए साथ मेरा, तो कोई गम नहीं है,

भूल गए वो पल, फिर भी आँखें नम नहीं हैं।

​फ़िक्र करो अपनी, अंधेरों में रह न पाओगे,

ढूँढोगे फिर कहाँ, मुझ सा दीया ना पाओगे?

आँधियों से लड़कर भी, मैं तो जलता रहूँगा,

मैं तो दीया हूँ, बस रोशन करता रहूँगा।

​दिन के उजाले में मुझे भूल जाने वाले,

घनी अंधेरी रात में मुझे याद करने वाले।

जो खुद जल के दुनिया को रोशन कर सकता है,

वो खुद के लिए भी खुद को बदल सकता है।

​मैं तो दीया हूँ, बस जलता रहूँगा,

दुनिया की राहों को, रोशन करता रहूँगा।

........आदि 🖋


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