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Aditya Singh

Romance Classics Others

4.0  

Aditya Singh

Romance Classics Others

खुशियों का दौर 🥃

खुशियों का दौर 🥃

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7

 ​तू दारू लेकर आ जा, बैठ जाम लगाएँगे,

कुछ आज की, कुछ कल की, बातें दोहराएँगे।

कह दो ज़माने से, जी भर कर के पीना है हमें आज,

न रोको, न टोको, जीना है हमें आज।

गमों को आज फिर पानी में मिलाएँगे,

खुशियों की बोतल आज खोल कर दिखाएँगे।

कल ही हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाएँगे,

तू दारू ला, बैठ कर जाम लगाएँगे।

ज़िन्दगी ने बहुत रुलाया, दारू ने बहुत हँसाया,

हर ग़म को हमने इसी से मिटाया।

​🖋️ Adi


डिस्क्लेमर@ "यह कविता केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति है और शराब के सेवन को बढ़ावा देना इसका उद्देश्य नहीं है।"



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