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Suresh Koundal

Tragedy


4.0  

Suresh Koundal

Tragedy


" तिरंगे का सम्मान "

" तिरंगे का सम्मान "

1 min 244 1 min 244


गणतंत्र दिवस परिचायक था ,

भारत के शौर्य , पराक्रम और शक्ति का ।

पर आज हिंसा, उत्पात, साधन बन गया,

आज़ादी की अभिव्यक्ति का ।।


कोई तो बताए

भारत माँ की अस्मत पर ,

क्यों हुआ प्रहार ?

सारा देश दहल उठा,

मच गई हाहाकर ।।


तिरंगे के सम्मान को ,

किसने ठेस पहुंचाई ?

किसानों के काँधों पर रखकर

किसने बन्दूक चलाई ?


लाल किले पर चढ़ उपद्रवियों ने

ये क्या अनर्थ कमा डाला ।

भारत की शान तिरंगे को हटा कर

कोई और ही ध्वज फहरा डाला ।।


साजिशों की बलि चढ़ गया ,

अन्नदाता का संघर्ष ।

राजनीति ने समीकरण बिगाड़े,

न कोई समाधान मिला, न निकला निष्कर्ष ।।


भारत माँ के हर सैनिक और किसान पर

है हर भारतीय को अभिमान ।

पर यह भी सच है सबसे बढ़कर ,

है तिरंगे का सम्मान ।।


हर कदम हमारा ऐसा हो ,

ना झुके देश की शान ।

सारे विश्व में चमके बन कर सूरज,

ये मेरा हिन्दोस्तान ।।


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