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Harish Bhatt

Romance

4  

Harish Bhatt

Romance

तेरी याद

तेरी याद

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सोचा था

तेरी याद के सहारे

जिंदगी बीता लूंगा

अब न तेरी याद आती है


न ही जिंदगी के दिन ही बचे

जो बचे भी उनमें क्या तेरे मेरे

क्या सुबह, क्या शाम

बस एक ही तमन्ना है


जहां भी रहो मुझे याद करना

क्योंकि तुम याद करोगे तो

दुनिया से जाते वक्त गम न होगा

क्योंकि तुम, तुम हो और हम, हम

राहें जुदा हो गई तो क्या


कभी मिलकर चले थे मंजिल की ओर

अब तो सोच कर भी सोचता हूं

क्यों मिले थे हम और क्यों बिछड़ेसोचता हूं


तेरी याद को ही भुला दूं

पर कमबख्त याद है ही ऐसी

भुलाते भुलाते भी रूला ही देती है तेरी याद।


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