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Kanchan Hitesh jain

Abstract

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Kanchan Hitesh jain

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तेरे जैसी बनने की कोशिश ..

तेरे जैसी बनने की कोशिश ..

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नहीं माँ मैं तेरे जैसी

बिलकुल नहीं हूँ माँ।

तेरे जितना धैर्य

मुझमें नहीं है माँ।


हमारी छोटी मोटी

गलतियों पर,

 पर्दा डाल देती थी 

करते गर कोई नादानी तो 

प्यार से समझाती थी तू।


मैं तो बच्चों की

छोटी छोटी गलतियों पर 

हाईपर हो जाती हूँ

करते गर कोई शैतानी तो

हाथ भी उठा देती हूं

तेरे जितनी सहनशीलता।


मुझमें नहीं है माँ

घर का पूरा काम करती

सबकी खुशी का ख्याल रखती

फिर भी नहीं थकती थी तू।


नौकर चाकर होते हुये भी

मैं तो थक जाती हूँ।

तेरे जैसे बनने की

रोज कोशिश करती हूँँ माँ।


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