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Vijay Kumar parashar "साखी"

Romance

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Romance

तेरा साथ

तेरा साथ

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तेरी यादों की कैद में रहना अच्छा लगता है

हर पल तेरा सपना देखना सच्चा लगता है।


सब ही रिश्तों से विश्वास उठ गया है, हमारा

बस एक तुझसे रिश्ता ही अपना लगता है।


ज़माने की ठोकरों से दिल नहीं टूटता है, मेरा

बस तेरी ठोकर से दिल को धक्का लगता है।


सब छोड़ दे लेकिन तू न छोड़ना हमें क़भी

एक तू ही दिल को दोस्त पक्का लगता है।


बैठे है हम गमों की महफ़िलों में तन्हा होकर,

तेरे साथ से ही हर गम का मिटाना लगता है।


बस ख़ुदा से यही दुआ हम हर रोज़ करते हैं

तू रहना सदा मेरे पास, तू दिल की है ख़ास

तुझे याद करना ख़ुदा की इबादत लगता है।


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