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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance

तेरा साथ

तेरा साथ

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344

जबसे लड़े हैं तुझसे नयन 

ये दिल तेरा हो गया सजन 

तेरे नाम से अब धड़कता है 

तेरे नाम की ही माला जपता है 

ना कहीं चैन है और ना है करार 

इतना तो नहीं हुए कभी बेकरार

बस रहता है हरदम तेरा इंतज़ार

न जाने अब कब होगा तेरा दीदार 

एक एक पल कटना भी मुश्किल है 

जुदाई के ये लम्हे बड़े ही कातिल हैं 

तेरे बगैर फिज़ा भी खिजां लगती है 

ये महफ़िल भी बेमजा सी लगती है 

तू गर साथ है तो वीराना भी आबाद है 

वरना तो ये जिंदगी लगती बरबाद है 

सेहरा बांध कर जल्दी आजा सनम 

मुझको डोली में बिठा के ले जा बलम 

मेरे दिल में अब तेरा ही दरबार है 

तेरी बाहों में अब मेरा घर-बार है।


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