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Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract

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Dhan Pati Singh Kushwaha

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तब ही तो सफल है रक्षाबंधन

तब ही तो सफल है रक्षाबंधन

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रक्षक बनें अपने और सबके

करें कार्य और विचारों का मंथन।

सब रक्षित हों और सभी सुरक्षित

तब ही तो सफल है रक्षाबंधन।


सब योगी हों सब ही हों निरोगी

सब हों रक्षक और सब सहयोगी।

रखें प्रफुल्लित अपने सबके मन

तब ही तो सफल है रक्षाबंधन।


अर्जित शक्ति करें आत्मरक्षा की

ये शक्ति बने सबकी ही सुरक्षा की।

सब ही सबको मानें निज परिजन

तब ही तो सफल है रक्षाबंधन।


प्रभु भी रक्षा उनकी ही करते हैं 

जो स्वयं उद्यमशील कर्मयोगी हो।

स्वार्थ- त्यागी परमार्थ उपासक ही

इस वसुधा को बनाएंगे नंदन-वन,

तब ही तो सफल है रक्षाबंधन।


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