STORYMIRROR

Rashmi Sinha

Inspirational

4  

Rashmi Sinha

Inspirational

ताली

ताली

1 min
326

ताली की गरिमा, गिरती ही जा रही है,

छक्कों की ताली से,

छक्कों पर ताली तक,

ताली हमेशा ही प्रश्न ही उठवा रही है।


प्री फिक्स मैच, और प्री फिक्स तालियां,

जिन्हें नही पता, वो जनता,

भावुकता में---

मूर्ख बनती जा रही है


ये जो दोनो हाथों की हैं तालियां,

अंधेर ढा रही हैं,

नेता के भाषण हों, या बॉस की तहरीरें

सिर्फ तालियां ही नही,तालियों के माध्यम से,

बहुत कुछ बटोरती जा रही हैं


तो जनाब----, छोड़िये तालियां

कुछ नया आजमाइए,

चुटकी बजाइये,

फुट टैपिंग से, सड़कें गुंजाइये,

बहुत कुछ गुंजाया जा सकता है,

तालियों के बगैर


गया दो हाथों की तालियों का दौर,

ईंट से ईंट बजाइये,

फैल रहा है अंधेरा, रौशनी फैलाइये,

जाग जाइये------


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational