स्वतंत्रता
स्वतंत्रता
जब आप अपने विचार कह सको,
अपनी इच्छानुसार काम कर सको,
न कोई रोक न कोई बंधन आपको रोके,
तब आप कह सकते हो हम स्वतंत्र है,
स्वतंत्रता और स्वतंत्र होने में थोड़ा ही फर्क है,
आज हम भारतवासी स्वतंत्र है,
पर हमें अपनी मर्जी से काम करने की स्वतंत्रता नहीं,
वर्ग भेद जातिभेद का सब जगह बोलबाला है,
जिस कारण हम स्वतंत्र होते हुए भी स्वतंत्रता के भागीदार नहीं,
स्वतंत्रता, समानता, शिक्षा का अधिकार सबको है,
पर क्या हम सभी इसके हकदार बने हैं,
क्या यहां गरीब और अमीर सबके लिए कानून समान है,
क्या हमें अपनी इच्छानुसार काम करने का हक मिला,
नहीं क्योंकि स्वतंत्रता शब्द प्रस्तावना से जुड़ा है,
और हम सिर्फ स्वतंत्र देश के वासी हैं।
