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Satish Chandra Pandey

Romance

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Satish Chandra Pandey

Romance

स्वप्न में रोज लिखती हूँ

स्वप्न में रोज लिखती हूँ

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स्वप्न में रोज लिखती हूँ

तुम्हारे नाम की कविता,

कहीं कोई देख ना ले

बस इसी चिंता में रहती हूँ,

इसलिए उन सबूतों को

मिटाकर ही मैं जगती हूँ।


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