STORYMIRROR

Meetzz Jagtap

Classics Inspirational

4  

Meetzz Jagtap

Classics Inspirational

स्वातंत्रता दिवस

स्वातंत्रता दिवस

1 min
238

सदियों पुरानी आज़ादी की दास्तान,

सुनते है इसे आज भी तो ले आती हैँ दिलों मे उफान,

कुछ अलग ही बात थी उन पराक्रमी शूर वीरों की,

जिन्हें परवाह नहीं थी अपनी जान की,


ना आँखों मे डर, होटों पर मुस्कान लिए,

हिंदुस्तान था जिनका गुरूर,

सर पर था जिनके देश की आज़ादी का सुरूर,

दिए ना जाने कितने अंतहीन बलिदान,


भेंट मे दिया अनमोल तिरंगा

जो है भारत का अभिमान,

नमन है उन शूर वीरों को,

जिन्होंने दिया आज़ादी का वरदान।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics