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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

स्वाधीनता भारत भाग्य,

स्वाधीनता भारत भाग्य,

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स्वाधीनता-सुप्राण हमारा, भारत भाग्य-विधाता|

सभी वीर बलशाली मेरे, आजादी के दाता||

कुटिल चाल से अंग्रेजों ने ,खूब किए थे शासन| 

रही आपसी फूट हमारी, मिला उन्हें सिंहासन|| 


डाला फूट किया था शासन, आपस में लड़वाए|    

कुछ लोगों पद-पैसे खातिर, भारत-भेद बताए|| 

पराधीन बदले में पाए, नैन खुले तब सारे|

कसे-कमर आजाद नशे में, रण बाँकुरे हमारे||


करने लगे विरोध बहिष्कृत, विधि उनके ललकारे|

मार-काट भी चले बराबर, डरे सभी हत्यारे||

प्राण नहीं प्यारी आजादी, हर जन-मन में ठानी| 

भारत हित में चूमे फाँसी ,बने देश के शानी|| 


कठिन युद्ध में मंगल पाण्डे, तात्या रानी झाँसी |

भगत राज सुखदेव हमारे, मरे चूमते फाँसी||

आजादी की अग्नि धधक से, जले कुछ गए मारे|

बचे शेष जो भगे यहाँ से, संध्या- शुबह -सकारे||


मिली हमें आजादी शुभकर, खुश हो खूब मनाते| 

हर शहीद को याद करें हम, श्रद्धा सुमन चढ़ाते ||

अमर वीर हैं देश हमारे, भारत मांँ जयकारे|

खूब लगाते पर्व मनाते, खुश हो जन किलकारे|| 




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