STORYMIRROR

Sarita Dikshit

Inspirational

4  

Sarita Dikshit

Inspirational

सुन बेटी तू बड़ी हो रही

सुन बेटी तू बड़ी हो रही

1 min
374

सुन बेटी तू बड़ी हो रही 

गांठ बांध ले तू कुछ आज

जीवन की कुछ सीख ले मुझसे 

कुछ मामूली और कुछ ख़ास


नहीं रोकती मैं उड़ने को 

खुले गगन में तुझे कभी

आस अगर निज पंखों से है

खुद पर भी रखना विश्वास


ताक लगाए बैठे अक्सर 

कई शिकारी राह-डगर

फंसना न उनके जालों में

तनिक जो हो अन्तःआभास


मैं न रहूँगी संग हमेशा

सफर में तेरे हर एक पल

पड़े अगर तूफान से लड़ना

अन्तर की सुनना आवाज़


सुनकर सारी बातें माँ की

बिटिया ने भी प्रश्न किया

कौन है अच्छा,कौन बुरा है?

हो कैसे इसका प्रतिभास


किस पर करूँ भरोसा बोलो

डर लगता है दुनिया से

अंधकार में गुम होने का

हरदम होता है एहसास


खाल में बैठे दुनिया के 

जाने कितने हैवान यहाँ

गैरो से डर अक्सर लगता 

घुटता दम और घुटती साँस


लड़की होना सहज नहीं है

लड़ूँ मैं दुनिया से कैसे?

गिद्ध भरी नज़रों से बचकर

कैसे मिले खुशी उल्लास


बेटी की चिंता है वाजिब 

माँ भी तो एक लड़की थी

उसने भी वो दंश थे झेले

माँ थी कल, बेटी है आज


पर माँ कैसे कहेगी बेटी,

पिंजरे में तू कैद रहे?

नहीं कुरूप ये दुनिया इतनी 

कर न निज मन को हताश


सीख तू रक्षा खुद की करना

हर जंग को तू तैयार रहे

कर खुद में समाहित आत्मबल

खुद में ही शक्ति कर तलाश।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational