STORYMIRROR

Rishab K.

Abstract Romance

4  

Rishab K.

Abstract Romance

सुकूते सेहरा

सुकूते सेहरा

1 min
319


Female :

मुखड़ा :

नज़र मिली है नज़र से ऐसे कि दिल की धड़कन बढ़ा गई है

तुम्हारे आने से ख़्वाब जागे, बहार सेहरा पे छा गई है


Male:

मुखड़ा :

नज़र तुम्हारी उतर के दिल में , हज़ारों अरमाँ जगा गई है

मैं अंदर अंदर पिघल रहा हूँ ये आग कैसी लगा गई है


अंतरा 1 :

नवाज़िशें हैं , गुज़ारिशें हैं, सिफारिशें हैं, इनायतें हैं

तुम आए जब से, हमारे दिल में , मुहब्बतें ही मुहब्बतें हैं


अंतरा 2: 

सुकूते सेहरा में दिल ने छेड़ा, फ़साना अपनी मुहब्बतों का

चराग़ राहों में जल उठे हैं, ख़ुमार छाया है चाहतों का।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract