STORYMIRROR

ritesh deo

Abstract

4  

ritesh deo

Abstract

सुकून

सुकून

1 min
351

" सुकून"

तुम्हारे लिए 

क्या है .....

मुझे नहीं पता 

मगर ,

मेरे लिए सुकून का

पर्यायवाची 

तुम ही हो ...


हाँ, सुकून की जगह 

जरूर बदलती रहती है

ज़रूरत देखकर ...

कभी तुम्हारा 

कंधा सुकून लगता है

कभी सुकून देती है

तुम्हारी बाँहें....


कभी तुम्हारी 

गर्म हथेलियों का स्पर्श 

महसूस होता है 

मरहम सा ....

कभी तुम्हारी गहरी 

आँखों में अपने आप

को देखकर खुश होना

लगता है सुकून....


कभी अपने लिए 

की गई फ़िक्र मुझे 

पहुँचाती है राहत... 

कभी तुम्हारे 

गले लगकर सुनना

तुम्हारी धड़कनों को 

लगता है सुकून....


कभी मेरे चेहरे पर

तुम्हारी निगाहों का 

आकर ठहर जाने का 

 लम्हा लगता है सुकून....


कभी तुम्हारा अचानक से 

मेरी उँगलियों के 

पोरों के खालीपन को

अपनी उँगलियों से उसकी

रिक्तता भर देना 

लगता है सुकून ...


कभी तुम्हारा 

ऐलाने - ए - इश्क़

प्रेम से लिखा प्रेम पत्र

और अंत में सबसे नीचे

अपने नाम के आगे लिखा

सिर्फ़ मेरी "

और उसके बाद लिखा

तुम्हारा नाम

मेरे लिए है सुकून....


बस_यही_है_मेरा_सुकून

तुम_से_तुम्हीं_तक_का

सफ़र_है__सुकून.


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract