सत्य की प्रणय-पुनीत
सत्य की प्रणय-पुनीत
आडंबर में रची है दुनिया,
जिसको देखो उतनी रीत,
ईश मगर है किसका मीत,
स्वीकृत किसकी कितनी प्रीत ।
रोके सत्यशाला है तुमको,
झोंको ना ख़ुद को बलप्रीत,
ईश-मिलन जब मन निर्मल -
यही सत्य की प्रणय-पुनीत !
