Love Telling Stories, History and Poetry...
पूछे दिल मेरा ये ज़वाल क्यूं दूं मैं खुद से उसको निकाल क्यूं। पूछे दिल मेरा ये ज़वाल क्यूं दूं मैं खुद से उसको निकाल क्यूं।
वो ही सावन के अधरों में, वो ही है सुरभित अंचल। वो ही सावन के अधरों में, वो ही है सुरभित अंचल।
यूँ बड़ी मैं क्यूँ हुई के सब लुटेरे बन गए यूँ बड़ी मैं क्यूँ हुई के सब लुटेरे बन गए
जीवन की मधुता है इसमें - दुख में भी मस्ती का गान. जीवन की मधुता है इसमें - दुख में भी मस्ती का गान.
वो ही नभ में नीली चादर, वो ही सरिता की छल-छल । वो ही नभ में नीली चादर, वो ही सरिता की छल-छल ।
कवि हूँ, लाया खूब तपाकर, शब्दों, तर्कों की भाला। कवि हूँ, लाया खूब तपाकर, शब्दों, तर्कों की भाला।
ईश मगर है किसका मीत, स्वीकृत किसकी कितनी प्रीत ईश मगर है किसका मीत, स्वीकृत किसकी कितनी प्रीत