स्त्री रूप
स्त्री रूप
मैं अकेली सहस्त्र संकट -
पथप्रदर्शक मैं स्वयं की -
मैं ही गौरी काली भी मैं
शक्ति का संकल्प मैं।
रण की भूमि जब रक्त रंज हो
शांति का विकल्प मैं ।।
मैं रमा सुखदायानी मैं
मैं समृद्धि का संचयन।
मैं समर्पण की हरीतिमा
हो कोई भी वन सघन।।
मां सुत अर्धांगिनी
इन रूपों में साक्षात्कार हूं।
मैं सारथी परिवार की
वीरता की हुंकार हूं।
द्वंद्व चाहे कैसा भी हो
अपनों का आधार है ।।
