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सुरभि रमन शर्मा

Abstract

4.2  

सुरभि रमन शर्मा

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स्त्री की परिभाषा

स्त्री की परिभाषा

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एक स्त्री.

जब रसोई में कड़छी, चम्मच चलाते हुए 

अचानक से बुनने लगती है 

अपनी आँखों में कोई सपना, तो 

बनता है पहले उसका उपहास।


वो सब कुछ परे कर 

पहले से ही आठ घंटे की जगह छः घंटे की 

नींद को थोड़ा और घटा चार कर देती है, 

और तैयार करने लगती है लगन से 

अपने सपनों का बॉर्डर।

उसके हाथ में सुई धागा,

और चकला बेलन की जगह 

जब रंगों में डूबे ब्रश या 


स्याही में डूबती कलम की सलाईयों से 

जब धीरे - धीरे एक सपना बॉर्डर पूरा कर 

आगे का आकार लेने लगता है 

तो उत्पन्न होने लगते हैं अवरोध, 

उसके बुने सपनों के फंदे को उलझाने के लिए, 

रसोई की गमक अब घर के सदस्यों को 

थोड़ा कम लगने लगती है, 


घर का हर कोना धूल से अटा दिखने लगता है 

कई जोड़ी आँखों को, 

अब विकल्प दो, या तो 

वो अपने सपनों के फंदे को 

उलझा के छोड़ दे, या फिर 

मूढमति से बुद्धिमती बन 

अब नींद घटा कर कर दे सिर्फ दो घंटे।


और फिर कई रात

उनींदी आँखें लिए 

जब लगन से तैयार कर लेती है 

वो अपने सपनों का स्वेटर, 

तो इस खूबसूरत और सफ़ल बुनाई का सारा 


श्रेय दे देती है वो उन "अवरोधों" को 

और एक बार फिर 

बुद्धिमती से मूढमति बन 

 चरितार्थ कर जाती है 

किताबों में छपी हुई 

स्त्री की महान परिभाषा।


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