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શૈમી ઓઝા "લફ્ઝ"

Inspirational

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શૈમી ઓઝા "લફ્ઝ"

Inspirational

सर्फदोशी...

सर्फदोशी...

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ए शहादत हमारी लोक दिलों

में यूं ही बस सी गई, इस सरफरोशी की तमन्ना ने हमें दीवाना कर दिया,

दीवानगी ने हद क्या कर दी, देश की आजादी और माँ भारत की भक्ति ने

हमें सामान्य से विशेष बना दिया, हमें देश के लिए शहीद कहलाना भी मंजूर था,

ए रंग भगवा कोई आम रंग थोड़ी है,

त्याग और बलिदान रग रग मैं,

आता है, यही तो है हमारी मंजिल,

देश कि आजादी,


पर क्यु हमारा दिया हुआ तोहफा,

लोग सही न, आजादी का दिन

आए तब हम सबके दिलों की धड़कन मैं गुंजते रहते है,

देश की बदीयों को क्यु नजर अंदाज करते है,


ऐसी बेरुखी देश भक्ति मत करे, हमारी आत्मा भी हँसती हे,

ए नादान तूने किस वजह से अपने आप को दुश्मन की गोली खाने के लिए छोड़ दिया,


हम वही आत्माएं है जो 100 साल पहले केसरिया रंग सजा कर भारत माँ के पास चले गए थे,

हमारा प्रण देश को संवारना था,

ये मजबूताई यूं न आयी थी,

बहुत डंडे और जैल की हवा खाई थी। हमने खून यूं ही नहीं बहाया,

अंग्रेजी शासन तो एक बहाना था, देश में परस्पर दंगे होना तो आम बात हुआ करती थी,

कभी मुगलों और मराठों के बीच हुआ करती थी,

पर विदेशी शासन का आगमन यूं न हुआ था,

न एकता, नासमझ दिल हमारे राजा हुआ करते थे,

अपने मतलब के वास्ते शत्रुओं से हाथ मिलाना ए मुर्खबाजी कौन करेगा भला,

ए मुर्खबाजी न की होती हमारे राजाओं ने तो ए अंग्रेज मामु यूं न घुसे आते,

बड़ी बेशर्म प्रजा है, हमारी जो ऐसे बीन औकातवाले के सर चढ़ जाते है,

ऐसे पागलपन में भाई ऐसा कौन होगा मूर्ख भला,

बराकपुर की छावणी हो या काकोरी ट्रैन हो, करेंगे या मरेंगे, हो

हर जगह एक ही,नारा गुंजेगा, भारत के घर का  

नागरिक तिरंगा के को हर दिन सलामी देगा,

हमारा सपना यूं ही बरबाद न करे, जग मैं एक ही नारा गुंजेगा, भारत तू महान है।



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