STORYMIRROR

DR MANORAMA SINGH

Abstract Action

4  

DR MANORAMA SINGH

Abstract Action

सर्दी का मौसम

सर्दी का मौसम

1 min
30

सर्दी के मौसम में सूरज

 चांद सी शीतलता देय,

छाये अंधियारो देखकर

ऐसो आभास जो होय,

सुबह ही लम्बी लगे

दोपहर अब गुम होय,

सूरज जब अस्ताचल को जाय,

ठंड पड़े जोर की

हाड़ कंपाती जाय,

तीखी शीतलहर से

अस्थिभेदन हो जाय,

जो तन पर शीतल जल लगे

सांस वहीं रुक जाय,

ठिठुरन बढ़े रात में

कोहरा बढ़ो जो छाय,

ओढ़ धुंध की चादर से

दृश्यता भी कम हो जाय,

हवा लगे तलवार सी

अंग अंग कट जाये,

 कड़ाके की इस ठंड से 

रजाई में ही जान बच पाये।।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract