सपने
सपने
आसमाँ से ऊँचे सपने अगर पाले हैं,
उड़ान लम्बी भरनी होगी !
गिर जाओ अगर ठोकर खाकर,
बिन बैसाखियों के उठ,
जंग लड़नी होगी !
सपने ही तो पँख लगा, पखेरू बना,
उड़ना सिखाते हैं !
दूर आसमानों में उड़ान भरवाते हैं !
सपने जो न सँजोये होते,
हम निढ़ाल, असहाय, सुस्त पड़े होते !
सपनों की इंद्रधनुषी दुनिया है,
बंद आँखों में भी रंगीनियाँ घुलवाती हैं !
सातों रँग उम्मीद जगाते हैं,
सात - समुन्द्र की सैर करवाते हैं,
अमरता के सपने जिन्होंहने पाले हैं !
वह देश की आन - बान - शान पर,
मर मिटने वाले हैं !
जीते हैं तो शेर की तरह,
मरते हैं तब भी शहीद का तगमा पाते हैं,
सपने हैं तो सपने हैं, आज टूटे, कल अपने हैं !
सपने रह जाए अधूरे, ठेस दिल को लगती है !
सपने जो हों पूरे, दिल की बाँछे खिलती हैं !
सपनों की भी अजीब दास्ताँ है,
कहीं राजगद्दी पर बिठाते हैं,
कहीं सूली पर चढ़वाते हैं !
भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव ने,
आज़ाद भारत का सपना पाला,
सपनों के तन - मन होम कर डाला !
महात्मा बुद्ध ने निर्वाहण का सपना पाला,
बौद्ध धर्म का स्थापत्य कर डाला !
मन में हो दृढ़ निश्चय,
सपने हकीकत बन जाते हैं !
वर्ना हक़ीक़त की चट्टानोँ से टकरा,
लहरों की तरह लौट आते हैं !
सपनों की भी अज़ीब दास्ताँ हैं,
कभी ख़ुशी, कभी गम अपना हैं !
सपनों को सपना समझ जियो,
कभी अमृत, कभी विष का घूँट,
आँख मूँद पियो !
छोटे सपनों में क्या जीना "शकुन",
पीना है तो निर्वाहण,
या शहादत का अमृत पीना !
