Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Ronak Dave

Classics

3  

Ronak Dave

Classics

सपने

सपने

1 min
414


नींदों में आकर भी ओझल हो जाते हैं

‎अपने हो कर भी टूट जाते हैं।

 

‎ख्वाब दिखाना इनकी

आदत सी हो गयी है।

 

‎आँखें खुलते ही उनको पाने की

चाहत सी हो गयी है।


‎ये वो दिखाते हैं

जो हम करना चाहते हैं।


‎ये वो भी दिखाते हैं

जो हम बनना नहीं चाहते हैं।


‎सुबह उठते ही एक कहानी

रात की सामने आती है।


‎कुछ अनकही बातें

दिल को बताती है।


‎ये सपने भी बड़े

अजीब होते हैं।

क्या दिखाते क्या करवाते हैं

‎ख्वाब तो लोग खुली आँखों से

देख जाते हैं,


‎पर सपने तो बंद

आँखों के सामने ही आते हैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics