Anita Mandilwar Sapna(world record holder)
Classics Fantasy
सपनों की उड़ान
रूकना नहीं अब
हो आँधी या तूफान
कहाँ सफर पर
उड़ान होगी
कोई नहीं है
अभी अनुमान
हैं कहाँ हम इतना गुणवान
थाम ली है
अब तो अपनी कमान
अपने से किया वादा
पूरा करने का अरमान
मन ही मन में
लिया है अब तो ठान
हाँ, सपनों की उड़ान !
दोस्ती बनें म...
सरहदें
ऑपरेशन सिंदूर...
पढ़ना बहुत जर...
अलौकिक प्रेम
वर्ष का अंतिम...
तितली
मानसून
महाश्वेता देव...
मिनीमाता' (फर...
रास लीला की कथा को, मैं सुनाता आज। ध्यान से सुन लो मनोहर, गूढ़ है ये राज॥ रास लीला की कथा को, मैं सुनाता आज। ध्यान से सुन लो मनोहर, गूढ़ है ये राज॥
शीश झुकाऊँ गुरु चरण में, आज यहाँ गुरु की महिमा कहता हूँ। शीश झुकाऊँ गुरु चरण में, आज यहाँ गुरु की महिमा कहता हूँ।
अक्रूर जी कहें कि आप कारण हैं प्रकृति आदि समस्त कारणों के । अक्रूर जी कहें कि आप कारण हैं प्रकृति आदि समस्त कारणों के ।
श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित भगवान ने तब संकल्प कर लिया। श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित भगवान ने तब संकल्प कर लिया।
जरासंध ने बीस हज़ार आठ सौ राजाओं को क़ैद किया भीतर क़िले के। जरासंध ने बीस हज़ार आठ सौ राजाओं को क़ैद किया भीतर क़िले के।
श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित सुनकर जरासंध के वध को। श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित सुनकर जरासंध के वध को।
काँप रही थी पृथ्वी, स्वर्ग भी था भयभीत। महिषासुर ने लिया, तीनों लोकों को जीत। काँप रही थी पृथ्वी, स्वर्ग भी था भयभीत। महिषासुर ने लिया, तीनों लोकों को जीत।
कैसे एक साधारण इंसान देवता समान ही श्रेष्ठ हो सकता है। कैसे एक साधारण इंसान देवता समान ही श्रेष्ठ हो सकता है।
लोकमर्यादा की रक्षा के लिए वहीं पर यज्ञ किया था उन्होंने। लोकमर्यादा की रक्षा के लिए वहीं पर यज्ञ किया था उन्होंने।
कृष्ण पत्नियाँ उनके बिछोह की आशंका में व्याकुल हो जातीं सब । कृष्ण पत्नियाँ उनके बिछोह की आशंका में व्याकुल हो जातीं सब ।
परीक्षित, भगवान की आज्ञा मानकर अक्रूर हस्तिनापुर चले गए। परीक्षित, भगवान की आज्ञा मानकर अक्रूर हस्तिनापुर चले गए।
जरासन्ध की सेना ने वहाँ वाणों की वर्षा कर दी थी. जरासन्ध की सेना ने वहाँ वाणों की वर्षा कर दी थी.
श्रीकृष्ण की सुन लो कथा तुम, आज पूरे ध्यान से। भवसागरों से मुक्ति देती, यह कथा सम्मान । श्रीकृष्ण की सुन लो कथा तुम, आज पूरे ध्यान से। भवसागरों से मुक्ति देती, यह कथ...
पाँच भूतों से विराट शरीर, ब्रह्माण्ड का निर्माण करते वे. पाँच भूतों से विराट शरीर, ब्रह्माण्ड का निर्माण करते वे.
प्रद्युमण ने तब कहा सारथी से अब मुझे तुम ले चलो द्युमान के पास फिर से। प्रद्युमण ने तब कहा सारथी से अब मुझे तुम ले चलो द्युमान के पास फिर से।
हाथ बढ़े तो देश की खातिर कंठ से हो बस जय जयकार हाथ बढ़े तो देश की खातिर कंठ से हो बस जय जयकार
श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित कृष्ण बलराम एक दिन गए थे प्रातक़ालीन प्रणाम करने के श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित कृष्ण बलराम एक दिन गए थे प्रातक़ालीन प्रण...
आज युद्ध की आहूती में बारी मेघनाद की आई थी मारूँगा या मर जाऊँगा सौगंध पिता की खाई थी आज युद्ध की आहूती में बारी मेघनाद की आई थी मारूँगा या मर जाऊँगा सौगंध पिता क...
श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित श्री कृष्ण की प्रत्येक पत्नी से. श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित श्री कृष्ण की प्रत्येक पत्नी से.
सलाह जो दी है आपको कि पांडवों के राजसूय यज्ञ में उनकी सहायता के लिए सम्मिलित हों । सलाह जो दी है आपको कि पांडवों के राजसूय यज्ञ में उनकी सहायता के लिए सम्मिल...